रहस्यकथाएं

सत्यजीत राय रचित

रहस्यकथाएं


Mystery 1

 कुछ पृष्ठ पढ़ें                                                                                                                         खरीदें    
        
        बाबा का चेला आकर बिल से नाग के मृतदेह को ले गया- सम्भवतः अन्तिम-संस्कार के लिए। साँप की लम्बाई देखकर मेरे मुँह से स्वतः ही एक विस्मयसूचक शब्द निकल गया। कोई नाग इतना लम्बा हो सकता है- यह मेरी धारणा से बाहर की बात थी। ईमलीबाबा धीरे-धीरे कुटिया की तरफ चले गये। हम तीनों जाकर जीप में सवार हो गये।
        रेस्ट-हाऊस की ओर लौटते समय धूर्जटिबाबू को गुमसुम बैठे देख उनसे एक बात कहे बिना नहीं रह सका। बोला, "साँप जब उनका पालतू था और आपका वह कोई अनिष्ट भी नहीं कर रहा था, तब आप उसे मारने क्यों गये?"
        मैं सोच रहा था कि वे शायद साँप तथा साधूओं के सम्बन्ध में और भी कुछ कड़ी बातें सुनाकर अपने कुकृत्य का समर्थन करने की कोशिश करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ न कर वे उल्टे मुझसे एक बिलकुल अप्रसांगिक प्रश्न कर बैठे-
        "खगम कौन था जनाब, खगम?"
        खगम? यह नाम कुछ सुना-सुना-सा लग रहा था, लेकिन कहाँ सुना था या पढ़ा था, यह याद नहीं आ रहा था। धूर्जटिबाबू और भी दो-एक बार खगम-खगम बुदबुदाकर फिर चुप कर गये।
        (कहानी से)
                                                                                                                                   

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Mystery 2

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        "उधर मत जाईयेगा बाबू।"
       जगन्मयबाबू चौंक गये। आस-पास कोई दूसरा भी है, इसका उन्हें आभास नहीं था; इसीलिए चौंके वे। पलटकर देखा, दाहिनी तरफ करीब दस हाथ की दूरी पर तेरह-चौदह साल का एक लड़का खड़ा था। वह नीले रंग का धारीदार हाफपैण्ट पहने था और शरीर पर हरे रंग का एक चादर ओढ़े हुए था। लड़के का रंग काला था, सिर के बाल ग्रामीण बालकों-जैसे कढ़े हुए थे और आँखों की दृष्टि शान्त थी एवं उससे बुद्धिमता झलक रही थी। जाहिर था कि ग्रामीण होने के बावजूद वह स्कूल में पढ़ता होगा। निपट अनपढ़ होने से ऐसी दृष्टि नहीं होती।
        "किधर नहीं जाऊँगा?" जगन्मयबाबू ने प्रश्न किया।
        "उस तरफ।"
        यानि रास्ते पर चलते हुए जगन्मयबाबू ने एकबार रुककर जिस तरफ दृष्टि घुमायी थी, उसी तरफ।
        "क्यों, क्यों नहीं जाऊँगा? क्या होगा जाने से?"
        "विष है।"
        "विष? किसमें?"
        "उस झाड़ी में।"
        (कहानी से) 
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