साहसिक अभियान

Adventure 1: चाँद का पहाड़ 

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विभूतिभूषण वन्द्योपाध्याय की गिनती बँगला के महान लेखकों में होती है। अगर कोई हिन्दीभाषी साहित्यरसिक इस नाम से परिचित नहीं है, तो उसे इतना बताना पर्याप्त होगा कि कालजयी रचना पथेर पाँचालीके रचयिता विभूतिभूषण वन्द्योपाध्याय ही हैं। यह रचना 1929 की है और सत्यजीत राय ने इस पर 1955 में विश्वप्रसिद्ध फिल्म बनायी थी।
विभूतिभूषण वन्द्योपाध्याय की रचनायें सामाजिक विषयों पर आधारित होती हैं, मगर किशोरों के लिए भी उन्होंने रहस्य-रोमांच से भरपूर एक उपन्यास की रचना की थी, जिसका नाम है- चाँदेर पाहाड़। उपन्यास का देशकाल है- 1909 का अफ्रिका, जब उसे अन्ध महादेश’ (Dark Continent) कहा जाता था; यानि उसके एक बड़े हिस्से तक मनुष्य के कदम तब नहीं पहुँचे थे।
कहानी का नायक शंकर रायचौधरी नामक एक नवयुवक होता है, जो किरानी बन कर शान्त जीवन बिताने के बजाय एडवेंचर से भरपूर जीवन जीने की इच्छा रखता है। उन दिनों अफ्रिका में ब्रिटिश सरकार द्वारा केन्या-उगाण्डा रेलवे’ (मोम्बासा से नैरोबी होते हुए विक्टोरियो झील के तटवर्ती शहर किसुमू तक) का काम चल रहा था और बहुत-से भारतीय वहाँ काम करने जा रहे थे। शंकर भी अफ्रिका जा पहुँचता है।
अफ्रिका में शंकर की मुलाकात संयोगवश पुर्तगाली खोजी दियेगो अलवरेज से होती है और दोनों मिल कर एक दिन प्रसिद्ध पीले हीरे की खान की खोज में निकल पड़ते हैं- मध्य अफ्रिका के विशाल रिख्टर्सवेल्ड पर्वतमाला की ओर, जिसे पुराने अभियात्रियों ने चाँद का पहाड़’ (Mountain of the Moon) का नाम दे रखा था। किंवदन्ति थी कि बुनिपनाम का एक दैत्य उस खान का रक्षक है।
चाँदेर पाहाड़’ 1937 में प्रकाशित हुआ था। सत्यजीत राय ने इसका आवरण बनाया था और कहानी के लिए चित्रांकन श्यामल कृष्ण बसु ने किया था। तब से अब तक यह रचना बँगला में लोकप्रिय है; 2013 में इस पर बँगला फिल्म बनी है, और आज इस उपन्यास के दर्जनों संस्करण बँगला में उपलब्ध हैं। अँग्रेजी में भी इसके कई अनूदित संस्करण उपलब्ध हैं, मगर हिन्दी में इस कालजयी रचना का अनुवाद अब तक उपलब्ध न होना अपने-आप में आश्चर्यजनक है। 
               ...तो उसी चाँदेर पाहाड़का हिन्दी अनुवाद चाँद का पहाड़प्रस्तुत है। अनुवाद के दौरान कोशिश तो रही है कि पढ़ते वक्त पाठकों को हिन्दी की किसी मौलिक रचना को पढ़ने-जैसा अहसास मिले।

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